Saturday, July 8, 2017

दोपहर का भोजन (Dopahar Ka Bhojan)

2 comments:

  1. ऐसा लगा जैसे बाहर तेज बरसात हो रही है और हम ऑंखें बंद किये कहानी सुनते हुए जाने कितने उतार चढ़ाव के बीच झूलते-उतराते आगे बढ़ते जा रहे हैं जहाँ दूर-दूर तक अँधेरा छाया है
    मर्मस्पर्शी कहानी

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    1. कविता जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया :)

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